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नए कलेक्टर साहब ने कार्यभार संभालते ही जैसे जिले का कायाकल्प ही कर
दिया ,बहुत कड़क माने जाते है और लोग जल्दी से उनके आस पास फटकते भी नहीं .आज एक
विद्यालय का वार्षिक उत्सव था और प्रिंसिपल साहब ने मुझे भी बुलाया था ,सामान्यतः
मै ऐसे अवसरों पर नहीं जाता क्योकि जिन्दगी भर स्कूलों में काम करते करते ये सब एक
सामान्य सी प्रक्रिया हो गई ,पर ना जाने क्यों मै इनकार ना कर सका और आ गया ,पता
चला कि कलेक्टर साहब ही चीफ गेस्ट है .अगली लाइन में सोफे पर ही बैठने का सौभाग्य
प्राप्त हुआ ,चीफ गेस्ट के आने पर मेरा परिचय भी कराया गया पर उससे पहले ही साहब
ने झुक कर मेरे पैर छुए ...
बड़े गौर से मैंने देखा तो जाना पहचाना चेहरा नज़र आया “अनुज “ हां यही
नाम था उसका अनुज त्रिपाठी और मेरे विद्यालय में ही पढता था .अनुज को में क्लास
सिक्स से जानता था ,हर साल उसको जबरदस्ती पास किया जाता ,ना ना अन्यथा ना ले ,अनुज
बहुत अच्छा बच्चा था ,मेधावी और हंसमुख ,सभी प्रतियोगिताओं में भाग लेता और स्कूल
का नाम रोशन करता ,चाहे खेल कूद हो या वादविवाद,सभी में फर्स्ट येहाँ तक सभी विषयो
में अच्छे नंबर पर गणित का नाम आते ही पता नहीं उसको क्या हो जाता था ,हमेशा फ़ैल
.नंबर ना के बराबर ,किसी तरह से से वह दसवी में आ गया था,पर लगातार फ़ैल होता रहा
,फाइनल में उसके पिता से भी अनुरोध किया पर बात बनी नहीं .सभी विषयों में
डिस्टिंक्शन लेने वाला अनुज मैथ्स में फ़ैल हो गया ,एक मोका मिला सप्लिमेंटरी का
उसमे भी फ़ैल और फिर उसे स्कूल छोड़ना पडा पर जब वो फ़ैल हुआ तब और जब उसने टी सी ली
तब भी मुझे रह रह कर अपनी बेबसी और एजुकेशन सिस्टम पर बड़ा गुस्सा आया पर धीरे धीरे
याद ही नहीं रहा ..
आज अनुज को देख कर संतोष हुआ ,अनुज ने सभी लोगो से मेरा परिचय कराया “,मेरे
गुरु ,जिन्होंने मुझे हमेशा बढ़ने की प्रेरणा दी,अगर ऐसे दो चार शिक्षक और हो जाए
तो पता नहीं कितने अनुज और बन आये” अदि अदि ,प्रोग्राम के बाद अनुज से उसके बारे
में जानकारी ली ,अनुज बोला सर स्कूल के बाद मैंने ओपन स्कूल से दसवी पास की फिर आर्ट्स में अपना करिएर
बनाया और अब आपके सामने हूँ ,दो व्यक्ति जिनके कारण आज में यहाँ हूँ ,उनमे से एक
आप है ,आपने ही मुझे लड़ना सिखाया ,परिस्थितियो से और स्वयं से भी
मै सोच रहा था हम लोग बेकार ही मार्क्स के चक्कर में फंसे रहते है और
अपनी कामयाबी बच्चो में खोजते है ,जो खुद ना न सके वो बच्चो को बनाना चाहते है
,मार्क्स के बाहर भी दुनिया है कभी उसे भी खोजे
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